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इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी टेक्नोलोजी: नवीनतम विकास और अनुसंधान ( Electric Vehicle Battery: new development and research)

जब इलेक्ट्रिक वाहन की बात आती है तो इसमें प्रयोग की जाने वाली इलेक्ट्रिक  व्हीकल बैटरी (electric vehicle battery) का जिक्र अवश्य होता है। और हो भी क्यों न। इलेक्ट्रिक वाहन की पॉपुलैरिटी का सारा दारोमदार इलेक्ट्रिक बैटरी की क्षमता पर निर्भर है। यही कारण है कि बैटरी की क्षमता में वृद्धि करने के लिए रिसर्च लगातार जारी है। इस ब्लॉग में हमारा प्रयास है की वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक बैटरी की क्षमता के विकास में की जा रही  बैटरी  टेक्नोलॉजी से आपका परिचय कराया जाए। अपेक्षा है की इस ब्लॉग को पढ़ने के पश्चात बैटरी को लेकर आपके ज्ञान में वृद्धि होगी।

 

इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी टेक्नोलोजी: नवीनतम विकास और अनुसंधान ( Electric Vehicle Battery: new development and research)

 

इलेक्ट्रिक बैटरी की एनर्जी स्टोरेज में वृद्धि:

 

Electric vehicle battery की क्षमता उसमें संग्रहित की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा पर निर्भर करती है। संग्रहित ऊर्जा की मात्रा को इलेक्ट्रिक बैटरी का ऊर्जा घनत्व (energy density) कहते हैं। ऊर्जा घनत्व इस बात का निर्धारित करता है की इलेक्ट्रिक बैटरी में प्रति यूनिट कितनी विद्युत ऊर्जा संग्रहित की जा सकती है। ऊर्जा घनत्व में प्रति यूनिट वृद्धि वाहन को अधिक दूरी तय करने में सक्षम बनाती है। कई इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता ऊर्जा घनत्व में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश कर रहे हैं,इसके परिणामस्वरूप, नए इलेक्ट्रिक वाहन लंबी ड्राइविंग रेंज के साथ जारी किए जा रहे हैं।

 

सॉलिड-स्टेट Electric Battery का प्रयोग:

 

 बैटरी के इस प्रारूप में तरल इलेक्ट्रोलाइट के स्थान पर ठोस इलेक्ट्रोलाइट का प्रयोग किया जाता है। ठोस इलेक्ट्रोलाइट बैटरी का ऊर्जा घनत्व अधिक होता है तथा इसे रिचार्ज करने में समय भी कम लगता है । ये प्रयोग की दृष्टि से अधिक सुरक्षित होती हैं क्योंकि इनमें ठोस इलेक्ट्रोलाइट के कारण लीकेज या आग लगने की संभावना कम होती है। सॉलिड स्टेट बैटरी तापमान परिवर्तन के प्रति कम संवेदनशील होती हैं इसके कारण इनका जीवनकाल अधिक होता है।

 

इलेक्ट्रिक बैटरी ( electric battery) जीवनकाल में वृद्धि:

 

एक वाहन चालक की पहली पसंद अधिक जीवन काल वाली इलेक्ट्रिक बैटरी होती है। इलेक्ट्रिक बैटरी को बार बार बदलना किसी भी उपभोक्ता को पसंद नहीं होता। इलेक्ट्रिक बैटरी निर्माण में नई तकनीकी के प्रयोग के कारण लंबे समय तक चलने वाली इलेक्ट्रिक बैटरी उपलब्ध हैं। आमतौर पर प्रयोग की जाने वाली लीथियम आयन बैटरी की क्षमता निर्माण में वृद्धि की गई है। कुछ निर्माता अब अपनी इलेक्ट्रिक बैटरी पर 10 साल या 100,000 मील तक की वारंटी दे रहे हैं, जो उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहन की ओर आकर्षित कर रहा है।

 

इलेक्ट्रिक बैटरी (electric battery) की रीसाइक्लिंग और स्टेबिलिटी:

 

वर्तमान दौर पर्यावरण संकट का है। ऐसे में उपभोक्ता ऐसे उत्पादों का अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करना चाहते हैं जो पर्यावरण हितैषी हो। इसीलिए बैटरी निर्माता ऐसी तकनीकी के विकास पर निवेश कर रहे हैं जो पर्यावरण के अनुकूल हो तथा इससे उत्पन्न कचरे को recycling किया जा सके। साथ प्रयोग की गई बैटरी के कबाड़ से नई बैटरी के निर्माण के लिए आवश्यक समाग्री प्राप्त की जा सके।

 

इलेक्ट्रिक बैटरी(electric battery) की फास्ट चार्जिंग तकनीकी:

 

फास्ट चार्जिंग तकनीक में हाल के वर्षों में सुधार हुआ है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन पहले की तुलना में कम समय में चार्ज किए जा सकते हैं। कुछ नए मॉडल्स को 20 मिनट से भी कम समय में 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है। फास्ट चार्जिंग विशेष रूप से उन ड्राइवरों के लिए अधिक उपयोगी है जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है तथा जिनके घर चार्जिंग स्टेशन से अधिक दूर होते हैं।

 

वायरलेस इलेक्ट्रिक बैटरी(electric battery)चार्जिंग पैड :

 

यह इलेक्ट्रिक बैटरी चार्जिंग की नई टेक्नॉल्जी है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रिक बैटरी को चार्ज करने के लिए एक चार्जिंग पैड का उपयोग किया जाता है। चार्जिंग पैड पर जब किसी वाहन को खड़ा किया जाता है, तब यह वाहन में लगी इलेक्ट्रिक बैटरी को wireless technology से चार्ज कर देता है। इस टेक्नोलॉजी में वायर और प्लग का प्रयोग न होने के कारण यह प्रयोगकर्ता के लिए बहुत सुविधाजनक होता है। चार्जिंग पैड को गैराज या पार्किंग कहीं भी स्थापित किया जा सकता है।

 

इलेक्ट्रिक बैटरी (electric battery) में वाहन-से-ग्रिड (V2G) प्रौद्योगिकी:

 

वाहन से ग्रिड ( V2G) टेक्नोलॉजी वर्तमान दौर की टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत वाहन की बैटरी को इलेक्ट्रिक ग्रिड से जोड़ा जाता है। जब वाहन खड़ा रहता हैं तब ये टेक्नोलॉजी ग्रिड से बिजली को खींचकर बैटरी में संचित कर लेती है। जब यही वाहन सड़क पर चलता है तो यह इलेक्ट्रिक बैटरी में संचित बिजली का उत्पादन करके वापस ग्रिड में भेजता है। यह टेक्नोलॉजी वाहन स्वामी को अतिरिक्त आय का श्रोत प्रदान करती है। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनी को भी संसाधन पर अतिरिक्त व्यय नहीं करने के कारण लाभ होता है।

 

निष्कर्ष:

 

 इलेक्ट्रिक बैटरी (electric battery) टेक्नोलॉजी में बहुत तेजी से विकास हो रहा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक बैटरी तकनीक में सुधार होगा यह इलेक्ट्रिक वाहन उपभोक्ताओं के लिए अधिक व्यावहारिक, सुविधाजनक और आकर्षक होता जाएगा। इलेक्ट्रिक बैटरी रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी पर निवेश तथा बैटरी के जीवन काल में वृद्धि इलेक्ट्रिक वाहनों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करन में मदद करेगा

 

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