ज्ञान वाटिका

GYAAN VATIKA

ज्ञान की प्रयोगशाला

ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी क्या है 2023 | what is green building in hindi | green building india

हाल के वर्षों में वैश्विक पटल पर पर्यावरण की स्थिरता और कार्बन फुटप्रिंट को कम  करने के लिए व्यापक चिंता देखी गयी है। मानव के द्वारा प्रयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु  को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए गंभीर रूप से प्रयास किया जा रहा है।  इन सबके बीच ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा दक्षता एवं टिकाऊ इमारतों के निर्माण के लिए तेजी से उभरता क्षेत्र बन गया है।  इस ब्लॉग में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी, इसके लाभ और इसका पर्यावरण पर प्रभाव संबंधित  बिंदुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे।  आइए देखें कि ग्रीन बिल्डिंग तकनीक निर्माण उद्योग को कैसे बदल रही है और सभी के लिए एक हरियाली, स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा दे रही है।

 

ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी क्या है 2023 | what is green building in hindi | green building india
ग्रीन बिल्डिंग के प्रमुख भाग

 

ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी क्या है?

 

ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी को टिकाऊ एवं पर्यवरण के अनुकूल टेक्नॉलजी के रूप में जाना जाता है।  इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता, ससांधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए इमारतों की डिज़ाइन और निर्माण कार्य किया जाता है।  ग्रीन बिल्डिंग का लक्ष्य पर्यावरण के हानिकारक प्रभाव को कम  करना, रहने वालों के लिए स्वस्थ एवं आरामदायक वातावरण का निर्माण करना तथा  ऊर्जा की खपत और अपशिष्ट उत्पादन की मात्रा को कम  करना है।  

 

ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी के मुख्य सिद्धांत-

 

 ऊर्जा दक्षता:

ऊर्जा-कुशल इमारतें ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने के लिए  विभिन्न प्रौद्योगिकियों और डिजाइन को प्रयोग में लाती है । इसके अंतर्गत  ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था, उपकरण और एचवीएसी सिस्टम का उपयोग करना सम्मिलित  है।  इसके अलावा सौर पैनल और पवन टर्बाइन जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों का भी उपयोग किया जाता है।  ।

सतत सामग्री:

हरी इमारतें प्राकृतिक संसाधनों के क्षय को कम करने तथा कचरे को प्रबंधित और नियंत्रित करने के लिए  पर्यावरण के अनुकूल पुनर्नवीनीकरण या तेजी से नवीकरणीय संसाधनों को शामिल करती हैं।

जल संरक्षण: 

जल संरक्षण टेक्नोलॉजी लो  फ्लो फिक्सचर  तथा रेन हार्वेस्टिंग प्रणाली का प्रयोग ग्रीन बिल्डिंग में किया जाता है। ऐसे करने से संसाधनों के संरक्षण के साथ पानी के अपव्यय को कम  करने में सहायता मिलती है। ‘word green building council’ के अनुसार  इमारतें दुनिया के मीठे पानी के संसाधनों का लगभग 13.6% उपभोग करती हैं। 

 इनडोर वायु गुणवत्ता:

ग्रीन बिल्डिंग  में आंतरिक वातावरण को स्वास्थ्य के अनुकूल बनाया जाता है।  इसके लिए बेहतर वेंटिलेशन, गैर विषैली निर्माण सामाग्री दक्ष फिल्ट्रेशन का प्रयोग किया जाता है ताकि बिल्डिंग में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रहे।   

अपशिष्ट कमी: 

इमारत के निर्माण के दौरान तथा इसके पूरे जीवन चक्र के दौरान ऐसे उपायों को अमल में लाया जाता है की कम  से कम  अपशिष्ट का उत्पादन हो। ग्रीन बिल्डिंग का उद्देश्य लैंडफिल को भेजे गए कचरे को काम करना है। 

 

 ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी के लाभ-

 

                                        पर्यावरणीय लाभ

कम कार्बन उत्सर्जन: हरी इमारतें कम ऊर्जा का उपभोग करती हैं, इसके परिणामस्वरूप ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन काम होता है जो जलवायु परिवर्तन की समस्या को कम  करने में उपयोगी होता है। वर्ल्ड ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के अनुसार, टिकाऊ सामग्रियों और निर्माण तकनीकों के उपयोग के माध्यम से हरित इमारतों में CO2 उत्सर्जन को 35 % से अधिक कम करने की क्षमता है।

  – प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण:  टिकाऊ सामग्री और कुशल संसाधन प्रबंधन का उपयोग करने से  लकड़ी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों भविष्य के लिए सुरक्षित रखता है।  

– जैव विविधता संरक्षण: पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री  पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीव आवासों को अतिक्रमण और विनाश से बचाने में मदद करती हैं।

 

                                              आर्थिक लाभ

– ऊर्जा लागत बचत: ग्रीन बिल्डिंग में रहने वाले व्यक्तियों की ऊर्जा लागत कम आती है। कम  ऊर्जा लागत से हुयी बचत का प्रयोग अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। 

– प्रॉपर्टी की वैल्यू में वृद्धि: वर्तमान समय में ग्रीन बिल्डिंग की डिमांड अधिक है।  यह खरीदारों और किरायेदारों को आकर्षित करती हैं जो स्थायी संपत्तियों के लिए हैंडसम कीमत भुगतान करने के लिए तैयार हैं।

सरकारी प्रोत्साहन: कई सरकारें ग्रीन बिल्डिंग पहल को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स में लाभ  और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।

 

                                          सामाजिक लाभ

– स्वस्थ वातावरण : ग्रीन बिल्डिंग व्यक्ति के लिए बेहतर आंतरिक वायु गुणवत्ता, ,प्राकृतिक प्रकाश और आरामदायक तापमान की व्यवस्था करती है।  इसके कारण  व्यक्ति के स्वास्थ्य और उत्पादकता में  सकारात्मक प्रभाव होता है।  एक्सेटर विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि इनडोर स्थानों में प्रकृति के तत्वों को शामिल करने से कर्मचारियों की भलाई और उत्पादकता में 15% की वृद्धि हो सकती है।

– सामुदायिक संवृद्धि  : ग्रीन बिल्डिंग प्रदूषण कम  करके एक बेहतर वातावरण उपलब्ध कराकर समुदायों की समग्र कल्याण में योगदान करती हैं।

 

 ग्रीन बिल्डिंग में प्रयोग की जाने वाली प्रमुख  टेक्नोलॉजी-

 

सौर ऊर्जा

सूरज की रोशनी का उपयोग करके सौर पैनल  के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। सौर ऊर्जा का उपयोग करने पर पारंपरिक  ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है जिसके परिणामस्वरूप कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायता मिलती है।  

 ऊर्जा दक्ष प्रकाश व्यवस्था :

एलईडी और सीएफएल  द्वारा  उत्पन्न प्रकाश पारंपरिक गर्म  बल्बों की तुलना में काफी कम ऊर्जा का उपभोग करते हैं।  इनके उपयोग से कमरे का तापमान भी कम  रहता है तथा इनका जीवनकाल भी लम्बा होता है।   

 ग्रीन रूफ:

वनस्पति से ढकी हुयी छत  को ग्रीन रूफ कहते हैं।  यह ताप अवरोधन का कार्य करती है,  हीट आइलैंड प्रभाव को कम करती हैं तथा  स्टॉर्म वाटर के प्रवाह को भी प्रबंधित करता है।  

रेन हार्वेस्टिंग :

वर्षा के जल को एकत्रित करने से टॉयलेट फ्लशिंग और सिंचाई जैसे कार्यों के लिए जल आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है। इस युक्ति का लाभ ये होता है की घरों में प्रयोग के लिए उपचारित जल के मांग में कमी आती है। इसके द्वारा भौमिक जल स्तर में वृद्धि की जा सकती है। एक शोध के अनुसार हरित इमारतें पारंपरिक इमारतों की तुलना में 20-30% कम पानी की खपत करती हैं, जिससे जल संसाधनों पर दबाव कम होता है और उपयोगिता बिल कम होता है।

स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन:

ग्रीन बिल्डिंग में  एडवांस ऑटोमेशन सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। इसका लाभ ये होता है की ये वातावरण के परिवर्तन के अनुरूप बिल्डिंग के भीतर के तापमान एवं प्रकाश को प्रबंधित करता है।  उदहारण के लिए किसी कमरे के भीतर व्यक्तियों की संख्या अधिक होने पर ये कूलिंग को बढ़ा देगा वहीँ संख्या काम होने पर तापमान को काम कर देगा।  यह इमारत की आवश्यकता आधार पर प्रकाश, एचवीएसी और अन्य बिल्डिंग सिस्टम को विनियमित करके ऊर्जा की खपत का अनुकूलन करते हैं।

 ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन :

कई संगठन ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणपत्र प्रदान करते हैं जो एक इमारत के स्थिरता प्रयासों को मान्य करते हैं। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग कौंसिल ( IGBC  ) दौरा जारी  प्रमाणपत्र में लीडरशिप इन एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल डिज़ाइन (LEED) सम्मिलित है।  द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) द्वारा विकसित एक राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली ‘ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (GRIHA)  इत्यादि ग्रीन बिल्डिंग प्रमारण  संस्थान हैं 

 

निष्कर्ष-

‘ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी’  निर्माण उद्योग में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भविष्य के महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी ऊर्जा दक्षता, टिकाऊ सामग्री और संसाधन के संरक्षण पर जोर देने के कारण आर्थिक और सामाजिक लाभ देते हुए पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव को काम कर देती है।    ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी को अपनाकर हम  इस धरती के स्वाथ्य को बेहतर बना सकते हैं ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को हरी भरी और टिकाऊ दुनिया उपलब्ध हो।  

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top