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जानिये बिना इंजन के इलेक्ट्रिक कार कैसे चलती है/ How Electric Car Works

 

वर्तमान दौर में इलेक्ट्रिक कारों की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।  इनके उदय के कारण ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री एक क्रांतिकारी परिवर्तन से गुजर रही है। पारंपरिक वाहनों के उत्सर्जन से क्षतिग्रस्त पर्यावरण की बहाली के लिए परिवहन के क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा संचालित वाहन की मांग लगातार बढ़ रही है।  इलेक्ट्रिक कार पर्यावरण की स्थिरता के लिए एक बेहतर विकल्प प्रस्तुत करती है।  वर्तमान दौर इलेक्ट्रिक कारों  का है,  ऐसे में लोगों के भीतर एक जिज्ञासा है कि आखिर बिना इंजन के इलेक्ट्रिक कार चलती कैसे है? आपकी इसी जिज्ञासा का समाधान सरल और सहज भाषा में इस ब्लॉग के माध्यम से किया जाएगा।  

 

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इलेक्ट्रिक कार कैसे कार्य करती है? How  Electric Car Works

 

इलेक्ट्रिक कार को चलाने के लिए  पारंपरिक कारों  की  तुलना में एक अलग प्रकार की  मैकेनिक्स का प्रयोग किया जाता है । इलेक्ट्रिक कार पारंपरिक  कार की तुलना में बिना इंजन के  होती है तथा इसमें ईंधन के रूप में विद्युत ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है।  इलेक्ट्रिक कार के संचालन में इलेक्ट्रिक बैटरी, विद्युत मोटर, मैनेजमेंट सिस्टम तथा रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम प्रमुख भाग  होते हैं । कार में प्रयुक्त बैटरी कार को चलाने के लिए इर्धन के रूप में विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति करती है। मोटर विद्युत ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है जिसके कारण कार के पहिये गतिशील हो जाते हैं।  मैनेजमेंट सिस्टम कार के उपकरणों में समन्वय और नियंत्रण रखता है।  रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम ब्रेक के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को क्षय होने के स्थान पर संचित करने का कार्य करता  है।  आगे इन सभी प्रमुख भागों के कार्य के संबंध  में विस्तार पूर्वक समझते हैं। 

 

 बैटरी (Battery): इलेक्ट्रिक कार का पॉवर हाउस 

 

इलेक्ट्रिक कार को चलाने  के  लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति कार में प्रयुक्त बैटरी द्वारा की जाती है।  कार  के कुल भार में अधिकांश हिस्सा इस भारी भरकम बैटरी का होता है।  आमतौर पर पारंपरिक कारों में प्रयोग में लायी जाने वाली बैटरी छोटे आकार की होती है। ये बैटरी एक सहायक की भूमिका में होती है जो कार के इंजन को स्टार्ट करने में या  कार के खड़े रहने पर आवश्यक विद्युत आपूर्ति करती है।

पारंपरिक  कारों को चलाने के लिए जहां  इंजन और ईंधन  के रूप में पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग किया  जाता है वहीं  इलेक्ट्रिक कार में इंजन के स्थान पर बैटरी तथा ईंधन के रूप में  विद्युत ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है। इलेक्ट्रिक कार में बड़े आकार की बैटरी का प्रयोग किया जाता है।  ये बैटरी ही कार को शक्ति प्रदान करती है।  बैटरी में एक रासायनिक प्रक्रिया  होती है जिसे इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं।  इस प्रक्रिया द्वारा  बैटरी विद्युत ऊर्जा का उत्पादन करती है। 

एक बैटरी की संरचना में  महत्वपूर्ण  भाग होते हैं- कैथोड , एनोड,  इलेक्ट्रोलाइट , सेपरेटर और करंट कलेक्टर ।  कैथोड धनात्मक इलेक्ट्रोड का कार्य करता है जबकि एनोड ऋणात्मक इलेक्ट्रोड का कार्य करता है। इलेक्ट्रोलाइट द्रव, जेल या ठोस से बना वह माध्यम होता है जिसमे  इलेक्ट्रोलिसिस क्रिया द्वारा उत्पन्न आयन  कैथोड और एनोड के बीच गति करते हैं। आयन की गति के कारण ही विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है। 

 सेपरेटर  एक छिद्रित झिल्लीनुमा संरचना होती है जो आयन के प्रवाह को मार्ग देते हुए इलेक्ट्रोड को एक दूसरे से भौतिक रूप से अलग  रखते हुए इनके संपर्क को रोकता है। दोनों इलेक्ट्रोड के आपस में संपर्क  के कारण बैटरी में शार्ट सर्किट हो जाएगा और बैटरी डैमेज हो जायेगी।   एनोड और कैथोड करंट कलेक्टरों से जुड़े होते हैं, जो आमतौर पर धातु की पन्नी से बने होते हैं, जो बैटरी के संचालन के दौरान उत्पन्न विद्युत प्रवाह को इकट्ठा करते हैं और संचालित करते हैं।

बैटरी दो प्रकार से कार्य करती है।  एक तब जब बैटरी को चार्ज किया जाता है।  दूसरा तब जब बैटरी में संचित विद्युत ऊर्जा का प्रयोग कार को चलाने के लिए किया जाता है। इस प्रकार बैटरी में दो प्रकार से क्रिया संपन्न होती है।  बैटरी की कार्य प्रणाली को विस्तार से जानने के लिए आप लेटेस्ट बैटरी टेक्नॉलजी ब्लॉग को इस लिंक के माध्यम सर्च कर सकते हैं। वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक कार में लिथियम आयन बैटरी का प्रयोग किया जा रहा है।  

 उदहारण स्वरुप यहाँ पर हम लिथियम आयन बैटरी की प्रक्रिया को समझते हैं।  

 

  • चर्जिंग प्रक्रिया के दौरान 

जब बैटरी को विद्युत के बाहरी स्रोत से संपर्क किया जाता है।  तब कैथोड पर स्थित लिथियम आयन आवेशित होकर कैथोड से बाहर निकलते हैं।  ये लिथियम आयन इलेक्ट्रोलाइट के माध्यम से एनोड पर पहुँचते हैं।  एनोड पर स्थित ग्रेफाइट से जुड़ जाते हैं।  इसके परिणाम स्वरूप विद्युत ऊर्जा का भण्डारण  होता है।  यानी की बैटरी चार्ज हो जाती है।    

 

  • डिस्चार्जिंग प्रक्रिया के दौरान 

जब बैटरी में संचित विधुत ऊर्जा का प्रयोग किसी उपकरण को चलाने के लिए किया जाता है तो इस प्रक्रिया को बैटरी की  डिस्चार्ज की प्रक्रिया कहते हैं।  इस प्रक्रिया में एनोड पर संचित लिथियम आयन इलेक्ट्रोलाइट के माध्यम से वापस एनोड पर चले जाते हैं।  लिथियम आयन की गति से विद्युत ऊर्जा निकलती है जिसका उपयोग उपकरण को बिजली देने के लिए किया जाता है।  

 

मोटर(Motor): कार के पहिये को घुमाने का उपकरण 

 

आमतौर पर इलेक्ट्रिक कार में दो प्रकार की मोटर का प्रयोग किया जाता है 

  • ब्रशलेस डीसी (BLDC) मोटर
  •  इंडक्शन मोटर (Induction Motor)

अपनी विश्वसनीयता, उच्च दक्षता और परफॉरमेंस के कारण यह इलेक्ट्रिक कारों में लोकप्रिय हैं।  

 

ब्रशलेस डीसी मोटर  (Brushless DC Motor)

 

ब्रशलेस डीसी मोटर  गति उत्पन्न करने के लिए ब्रश के स्थान पर चुंबक  का प्रयोग करती है।  इस मोटर के मुख्यता तीन भाग होते हैं- इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर, स्टेटर तथा रोटर।  स्टेटर मोटर का स्थिर भाग है, जबकि रोटर घूमने वाला भाग होता है।  

मोटर के भीतर  रोटर पर एक स्थायी चुंबक होता है।  स्टेटर पर एक से अधिक संख्या में  वाइंडिंग होती है।  जब स्टेटर की वाइंडिंग से विद्युत धरा प्रवाहित होती है तब इसके परिणाम स्वरुप एक चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण होता है। रोटर और स्टेटर के मध्य  चुंबकीय क्षेत्र  की प्रतिक्रिया के कारण रोटर घूमने लगता  है। 

इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रक सेंसर की सहायता से रोटर की घूर्णन की स्थिति की निगरानी करता है।  यह रोटर  घुमाते रहने के लिए निर्धारित समय पर वाइंडिंग में विद्युत प्रवाह की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। सरल शब्दों में, बीएलडीसी मोटर रोटर को घुमाने के लिए स्टेटर और रोटर द्वारा बनाए गए चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करती है। इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रक यह सुनिश्चित करता है कि वाइंडिंग में सही समय पर सही मात्रा में करंट प्रवाहित हो, जिससे मोटर सुचारू रूप से और कुशलता से चल सके।

 

इंडक्शन मोटर (Induction Motor)

 

इंडक्शन मोटर गति उत्पन्न करने के लिए चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करती है। इसके दो मुख्य भाग हैं -स्टेटर और रोटर। स्टेटर मोटर का स्थिर भाग है, जबकि रोटर घूमने वाला भाग है।

इंडक्शन मोटर को एसिंक्रोनस मोटर्स के रूप में जाना जाता है।  यह इलेक्ट्रिक कार में लोकप्रिय विकल्प है।  ये मोटर विद्युत  चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता  है।  इंडक्शन मोटर में वाइंडिंग के साथ एक स्थिर स्टेटर तथा कंडक्टिंग बार या स्क्विरल-केज कंडक्टर से बना रोटर होता है। जब स्टेटर की वाइंडिंग पर AC  करंट को प्रवाहित किया जाता है तब एक घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण होता है जिसके कारण रोटर घूमने लगता है।  

इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग किए जाने वाली  बीएलडीसी और इंडक्शन मोटर्स दोनों के अपने अलग अलग फायदे और कमियां हैं। बीएलडीसी मोटरें अधिक कुशल और कॉम्पैक्ट होती हैं, जिससे वे इलेक्ट्रिक कार निर्माताओं के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन जाते हैं। दूसरी ओर, इंडक्शन मोटर्स का डिज़ाइन सरल होता है और वे अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं। मोटर प्रकार का चुनाव विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें वाहन की बिजली की आवश्यकताएं, वांछित प्रदर्शन, लागत विचार और कार निर्माता की डिजाइन प्राथमिकताएं शामिल हैं।

 

रिजेनेरटिव ब्रेकिंग सिस्टम (Regenerative Breaking System):  ऊर्जा पुनर्प्राप्ति टेक्नोलॉजी

 

ये इलेक्ट्रिक कार में प्रयोग में लायी जाने वाली एक बेहतरीन टेक्नोलॉजी है।  जब आप कार चलाते हैं तो पूरी यात्रा के दौरान कई बार ब्रेक का प्रयोग करना पड़ता है।  ब्रेक को दबाने पर कार की  गति  को कम  करने के लिए ब्रेक पैड  घर्षण प्राप्त करने के लिए ब्रेक डिस्क के विरुद्ध रगड़ उत्पन्न करते हैं।  इस प्रक्रिया में ऊष्मा उत्पन्न होती है। ये उत्पन्न ऊष्मा कार को किसी भी प्रकार की शक्ति न देने के कारण व्यर्थ चली जाती है। लेकिन रिजेनेरटिव ब्रेकिंग  सिस्टम एक स्मार्ट तकनीकी है यह ब्रेक के दौरान उत्पन्न ऊष्मा को व्यर्थ नहीं जाने देती बल्कि यह इसकी ऊर्जा का उपयोग बैटरी को रिचार्ज करने  तथा अन्य प्रणालियों को विद्युत ऊर्जा देने के लिए करती है।  

जब रिजेनेरेटिव सिस्टम वाली कार में ब्रेक का प्रयोग किया जाता है तब वाहन में प्रयुक्त इलेक्ट्रिक मोटर विपरीत दिशा में कार्य करने लगती  है।  यह एक जनरेटर के रूप में कार्य करती है जो कार की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है। इस विद्युत ऊर्जा को वापस बैटरी में भेज दिया जाता है जो बाद में उपयोग के लिए संग्रहित  हो जाती है।  इस संग्रहीत ऊर्जा का उपयोग कार के विद्युत घटकों, जैसे लाइट, एयर कंडीशनिंग, या यहां तक कि जरूरत पड़ने पर वाहन को गति देने के लिए भी किया जा सकता है।

 

कंट्रोल सेंटर (Control Centre): इलेक्ट्रिक कार का मस्तिष्क  

 

इलेक्ट्रिक कार में कंट्रोल सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।  यह कार में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों के संचालन  का प्रबंधन एवं समन्वय करता है। नियंत्रण केंद्र अपने कार्यों के कुशलता पूर्वक संचालन  के लिए उन्नत प्रणाली एवं इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर होता है जिसके अंतर्गत सेंसर, प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर सम्मिलित होता है।  

 कंट्रोल सेंटर इलेक्ट्रिक वाहन  में  प्रयोग में लाये जाने वाले विभिन्न उपकरणों की निगरानी और नियंत्रण कर सकता है। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक कार में कंट्रोल सेंटर बैटरी, टायर के दबाव, इर्धन की खपत इत्यादि के निर्धारित मापदंडों की निगरानी कर सकता है।  इस जानकारी के आधार पर, नियंत्रण केंद्र प्रदर्शन को अनुकूलित करने, सुरक्षा बढ़ाने और क्षति को रोकने के लिए समायोजन कर सकता है या चेतावनी जारी कर सकता है। 

ऐसे ही इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी को प्रबंधित करने के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जाता है।  

 

क्या है बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) BMS

 

इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम एक केयरटेकर की भांति  कार्य करता है। यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि बैटरी स्वस्थ रहे, अच्छा प्रदर्शन करे और लंबे समय कार्यशील रहे । यह बैटरी के तापमान, वोल्टेज और करंट जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर की मॉनिटरिंग करता ।  यदि इनमें कोई भी पैरामीटर सुरक्षित सीमा से बाहर जाता है, तो BMS बैटरी की सुरक्षा और क्षति को रोकने के लिए कार्रवाई करता है।  

BMS  इस बात का ध्यान  रखता है कि बैटरी कितनी चार्ज है। यह आपको बताता है कि बैटरी में  पावर बची है ताकि आप जान सकें कि रिचार्ज करने से पहले आप कितनी दूर तक गाड़ी चला सकते हैं। यह कार के सिस्टम को बैटरी पावर का कुशलतापूर्वक उपयोग करने में भी मदद करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यह यथासंभव लंबे समय तक चले।

इसके अतिरिक्त,  BMS  बैटरी में प्रयुक्त सेल्स  को संतुलित करने में मदद करता है। इलेक्ट्रिक कार बैटरियां कई छोटे छोटे सेल्स से निर्मित होती हैं।  BMS सभी सेल्स  में पावर को  बराबर वितरित करने के लिए कार्य  करता है तथा  यह सुनिश्चित करता है कि वे सभी समान रूप चार्ज हों और उपयोग किये जा सके । यह बैटरी की समग्र क्षमता और जीवन काल को अधिकतम करने में मदद करता है।

 BMS  बैटरी की क्षमता को प्रभावित वातावरण के तापमान में होने वाले उतर चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करता है । उदाहरण के लिए, यदि बैटरी बहुत गर्म या बहुत ठंडी हो जाती है, तो  BMS  इसके तापमान को अधिक ठंडा होने या गर्म  होने को नियंत्रित करता है। यह बैटरी में आने वाली कोई समस्या जैसे शॉर्ट सर्किट, डैमेज  सेल और किसी अन्य समस्या को रोकने के लिए कार्रवाई कर सकता है।

उम्मीद आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद इलेक्ट्रिक कार कैसे कार्य करती है की संपूर्ण प्रणाली को समझ गए होंगे।  इलेक्ट्रिक कार  की कार्य कुशलता और इसके विकास के लिए  उपयोग में आने वाली अवसंरचना को और अधिक दक्ष और कुशल बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है 

 

3 thoughts on “जानिये बिना इंजन के इलेक्ट्रिक कार कैसे चलती है/ How Electric Car Works”

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