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भारतीय कृषि में क्रांति लाने वाले 6 फार्मिंग ड्रोन के कार्य और प्रकार

कृषि सदियों से भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। वर्तमान समय में  प्रौद्योगिकी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र  में अपनी पैठ बना रही है। कृषि क्षेत्र में प्रयुक्त ड्रोन भारत में खेती के परिदृश्य में बड़ी तेजी से बदलाव ला  रहे हैं। कृषि कार्यों में ड्रोन का प्रयोग किसानों को उनकी उत्पादकता बढ़ाने, समय बचाने और सटीक सूचना के आधार पर  निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं। आइए इस ब्लॉग में भारतीय कृषि में क्रांति लाने वाले 6 फ़ार्मिंग ड्रोन के कार्य और प्रकार  के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं 

 

भारतीय कृषि में क्रांति लाने वाले 6 फार्मिंग ड्रोन के कार्य और प्रकार
फार्मिंग ड्रोन किसानों के मित्र

 

1 छिड़काव करने वाले ड्रोन (Spraying Drones)

 

छिड़काव ड्रोन को क्रॉप डस्टिंग ड्रोन ( crop-dusting drones) भी कहा जाता है।  इस ड्रोन के प्रयोग ने कृषि क्षेत्र में कीट और रोग प्रबंधन में एक क्रांति ला दी है। छिड़काव ड्रोन फसलों  के लिए आवश्यक  उर्वरकों, कीटनाशकों और शाकनाशियों का  कुशलतापूर्वक प्रबंधन करते हैं। इसके प्रभाव से  शारीरिक श्रम की आवश्यकता में कमी और हानिकारक रसायनों के जोखिम में गिरावट आती है । “डीजेआई एग्रास टी40”,  “गरुड़ एयरोस्पेस”, “एरियल  रोबोटिक्स” जैसी कंपनी भारत में ड्रोन का निर्माण कर रही हैं।  प्रति लीटर क्षमता के अनुसार स्प्रे ड्रोन की कीमत आमतौर पर 3.5 से 11.5 के मध्य है।  

 

2 मैपिंग ड्रोन: (Mapping Drone)

 

मैपिंग ड्रोन कृषि कार्यों में प्रयोग  किए  जाने वाले ड्रोन में  खेतों के लिए हाई टेक मानचित्रकारों की भाँती होते हैं। ये ड्रोन किसी क्षेत्र क्षेत्र के मानचित्रण के लिए अपने उन्नत सेंसर और कमरे की सहायता से डाटा  का विश्लेषण करके सटीक मानचित्र तैयार करते हैं। ये मानचित्र किसानों को फसल की सेहत की  पहचान करने, पानी की आवश्यकता का पता लगाने तथा मिटटी का विश्लेषण करने में मदद करते हैं।  ड्रोन द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर किसान  खेतों की सिंचाई, पोषक तत्वों की आवश्यकता  और रोपण  के संबंध  में अपनी रणनीति बनाने में सक्षम होते हैं।  “सेंसफ्लाई ईबी एक्स”, “पैरेट ब्लूग्रास” जैसे ड्रोन एक मैपिंग ड्रोन के रूप में कार्य करते हैं। 

 

3.सर्वेक्षण ड्रोन:(Surveying Drone)

 

भूमि सर्वेक्षण के क्षेत्र में सर्वेक्षण ड्रोन ने क्रांतिकारी बदलाव दिया है।  सर्वेक्षण के दौरान ये पूरे   परिदृश्य का एक  3डी मॉडल बनाते हैं, जिससे किसानों को अपनी भूमि  का आकलन करने और क्षेत्र के  लेआउट के आधार पर प्रभावी ढंग से योजना बनाने में मदद मिलती है । यह तकनीक मिट्टी के कटाव को रोकने, जल निकासी प्रणालियों को बेहतर बनाने  और समोच्च  खेती को डिजाइन करने में सहायता करती है।  ये ड्रोन किसी भी प्रकार की भूमि के प्रबंधन में किसानों प्रभावी सहायता करते हैं।  “ट्रिनिटी F90+” , “ब्लैक दृष्टि”  जैसे ड्रोन एक सर्वेयर ड्रोन के प्रकार हैं।  

 

4.निगरानी ड्रोन:(Monitoring Drone)

 

निगरानी ड्रोन खेतों के की पल पल के स्थिति की जानकारी रखते हैं। थर्मल सेंसर  और मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरों से युक्त ये ड्रोन फसल के तापमान और वर्णक्रम में होने वाले किसी भी परिवर्तन का पता आसानी से लगा लेते हैं। ये परिवर्तन नग्न आँखों से देख पाना संभव नहीं होता है।  आंखों को दिखने से पहले किसी रोग को पहचान लेना तथा उसका शीघ्रता से इलाज़ करके फसल में बड़ी मात्रा में होने वाले नुकसान  को रोककर अधिक मात्रा में फसल का उत्पादन किया जा सकता है।  “पैरट अनाफी यूएसए” थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस एक उन्नत निगरानी ड्रोन है

 

5.सीडिंग ड्रोन: (Seeding Drone) 

 

सीडिंग ड्रोन खेतों में बीज बोने  वाला ड्रोन का एक प्रकार है। इनकी खासियत  ये होती है की ये उचित दूरी को बनाते होये उचित मात्रा में बीजों को खेतों में बिखेरते हैं।  इसके परिणाम स्वरूप बीजों की बर्बादी काम होती है।  और फसलें भी उचित दूरी में उगने के कारण पोषक सही मात्रा में उपयोग करती हैं जिसका परिणाम अधिक उत्पादन के रूप में प्राप्त होता है।  ये ड्रोन विस्तृत क्षेत्र में बीजरोपण के कार्य के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।   बीज बोने की स्वचालित प्रक्रिया से किसान अपना काफी  समय बचा लेते हैं।  एक स्थानीय भारतीय स्टार्टअप द्वारा विकसित सोइंग ड्रोन “SD-Z40” ने देश भर के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। यह ड्रोन सटीक बीज प्लेसमेंट सुनिश्चित करता है, अंकुरण दर बढ़ाता है

6.मौसम ड्रोन: (Weather Drone)

 

कृषि में मौसम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मौसम ड्रोन तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और वर्षा सहित वास्तविक समय का वायुमंडलीय डेटा एकत्र करते हैं। यह जानकारी किसानों को मौसम परिवर्तन का अनुमान लगाने और सिंचाई, कटाई और फसलों को प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के बारे में समय पर निर्णय लेने में मदद करती है। “स्काई लिंक” मौसम ड्रोन मौसम डेटा संग्रह के लिए गेम-चेंजर बन गया है

निष्कर्ष:

 

भारत में कृषि कार्य में  अलग अलग कार्यों के लिए विभिन्न प्रकार के ड्रोन के प्रयोग से कृषि के परिदृश्य में परिवर्तन आ रहा है।   ये ड्रोन  सिर्फ एक उपकरण नहीं हैं बल्कि किसानों के बेहतर मित्र साबित हो रहे हैं। ये  किसानों को बेहतर तरीके से काम करने, लागत कम करने और उपज को लगातार बढ़ाने के लिए सशक्त बनाते हैं। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, हम उम्मीद कर सकते हैं कि और भी अधिक परिष्कृत ड्रोन कृषि क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे खेती के परिदृश्य में और क्रांति आएगी और देश में खाद्य सुरक्षा में योगदान मिलेगा। इन तकनीकी प्रगति को अपनाकर, भारतीय किसान कृषि के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहे हैं।

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