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भारतीय कृषि में चमत्कारी बदलाव लाने वाली टेक्नोलॉजी | New Technology In Indian Agriculture Sector 2023

भारत में कृषि क्षेत्र में नयी टेक्नोलॉजी का प्रवेश क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बन रहा है।  आज जब टेक्नोलॉजी  प्रत्येक क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण साधन बन गयी है तो भला कृषि क्षेत्र इससे कैसे अछूता रह सकता है। कृषि कार्यों में नयी नयी टेक्नोलॉजी का प्रवेश खेत से लेकर बाजार तक कृषि उत्पादों के  बेहतर उत्पादन, प्रबंधन एवं नियमन  में  महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखती है।  ये ब्लॉग आपको ये बताएगा की  भारत में कृषि क्षेत्र में नयी तकनीकी 2023 कौन सी  हैं जो भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव का सामर्थ रखती है।   

 

भारतीय कृषि में चमत्कारी बदलाव लाने वाली टेक्नोलॉजी | New Technology In Indian Agriculture Sector 2023
कृषि क्षेत्र में नई टेक्नॉलजी का प्रयोग

 

ऊर्ध्वाधर खेती ( vertical  farming)

 

पारंपरिक  रूप से कृषि  कार्य  क्षैतिज भूमि पर किया जाता परन्तु  इस प्रणाली  के अंतर्गत कृषि ऊर्ध्वाधर प्रारूप में की जाती है।  यह घर के अंदर पौधों को उगाने का एक प्रकार है, इसमें पौधों को किताबों की अलमारी की तरह अलग अलग खानो में एक दूसरे के ऊपर परतों में रखा जाता है। इस टेक्नोलॉजी में  पौधों का  विशेष रोशनी और पोषक तत्वों के साथ नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है।

ऊर्ध्वाधर खेती में, पौधों की सभी जरूरतों को हाइड्रोपोनिक, एक्वापोनिक और एरोपोनिक तकनीकों का उपयोग करके कृत्रिम रूप से पानी, पोषक तत्व और प्रकाश प्रदान करके पूरा किया जाता है।आज जब बढ़ती जनसँख्या के कारण कृषि भूमि का क्षेत्रफल लगातार घट  रहा है वहां ये टेक्नोलॉजी कम  क्षेत्र में अधिक और विविध कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है।  आजकल शहरों  में कृषि का यह प्रारूप प्रचलन में है जहाँ पर एक शेल्फ पर सलाद, दूसरे पर टमाटर और तीसरे पर  जड़ी-बूटियाँ उगते हुए देख सकते हैं। 

 

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी  (Blockchain Technology) 

 

आज कृषि क्षेत्र में आपूर्ति प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा जैसी  प्रणाली में ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत कृषि उत्पादों को खेत से लेकर बाजार तक आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। उपभोक्ता को  कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उसके उगाने के तरीके को लेकर पारदर्शी जानकारी प्राप्त होती है। ये टेक्नॉलजी आपूर्ति श्रृंखला में बिचौलियों के प्रभाव को कम  करती है जिसके परिणाम स्वरूप किसानों की आय अधिक होती है तथा उपभोक्ता को कृषि उत्पाद कम कीमत पर प्राप्त होता है।  

 

कृषि में डिजिटल ट्विन (Digital Twins in Agriculture)

 

 यह एक मजेदार कांसेप्ट है।  यह टेक्नोलॉजी एक किसान के खेत की कंप्यूटर पर एक आभासी दुनिया का निर्माण करती है। कंप्यूटर पर इस आभासी दुनिया में वह सभी घटनाएं होती हैं जो उसके वास्तविक खेत पर घट रही होती हैं जैसे किसान  छोटे-छोटे पौधों को उगते हुए, छोटे-छोटे जानवरों को इधर-उधर घूमते हुए, और यहाँ तक कि धूप और बारिश के प्रभाव को भी देख सकता है।

 इस आभासी खेत को वास्तविक खेत का डिजिटल ट्विन कहते हैं। इस टेक्नोलॉजी का लाभ यह है कि किसान को सही समय पर इस बात का पता चल जाता है  कि  पौधों को पानी कब देना है, बारिश खेत पर क्या प्रभाव डाल सकती है।  सही समय पर सही  जानकारी एक किसान को अपने खेत को प्रबंधित करने में अधिक सक्षम बनाती है । इस तकनीक के उपयोग से फसल की पैदावार में सुधार और फसल की बर्बादी में कमी लायी जा सकती  है।  2023 में कृषि में डिजिटल ट्विन्स का उपयोग बढ़ने का अनुमान है।

 

परिशुद्ध कृषि (Precision Agriculture)

 

भारत में कृषि कार्यों के दौरान किसानों की अज्ञानता के कारण आवश्यकता से अधिक पानी, कीटनाशक, उर्वरक इत्यादि का प्रयोग होता है। परिशुद्ध कृषि  खेती का एक ऐसा तरीका है जहाँ पर कृषि कार्यों के लिए ड्रोन,सेंसर ,एआई,आईओटी, जीआईएस जैसी टेक्नोलॉजी को प्रयोग में लाया जाता है।  ये टेक्नोलॉजी मिट्टी की संरचना,मौसमी दशाएं,पशुधन  इत्यादि के विषय में डाटा एकत्र करके उनका विश्लेषण करती हैं।

डाटा  द्वारा प्राप्त परिणाम के आधार पर एक किसान को कृषि कार्यों में  पौधों के लिए पानी, कीटनाशक,उर्वरक, पोषक तत्त्व, बीज और उपयोग में आने वाले श्रम के विषय में  इनपुट दिया जाता है। इस इनपुट के आधार खेती करने से कृषि लागत में कमी तथा अधिक उत्पादकता जैसे सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। 

 

स्वचालित कृषि उपकरण (Automation) 

 

ड्रोन जैसे स्वचालित उपकरणों के प्रयोग से कृषि में श्रम से संबधित समस्या का समाधान हो रहा है।  ये मशीने बिना थके और बिना रुके काम समय में अधिक कार्य कर सकती हैं। स्वचालित कृषि उपकरणों का उपयोग करके किसान समय बचा सकते हैं, श्रम व्यय में कटौती कर सकते हैं और कार्य की  सटीकता बढ़ा सकते हैं। परिश्रम कार्यों में बिना रुके काम करने और विराम  की आवश्यकता को खत्म  करके स्वचालित उपकरण कृषि  उत्पादकता बढ़ाने में मदद करता है।  

 

रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन (Robotics and Automation) 

 

सोचिये कृषि कार्यों में आपका साथ देने के लिए छोटे छोटे रोबोट हों तो क्या बात है।  ये रोबोट मिटटी में बीज बोने , पौधों पर पानी छिड़कने , उर्वरक और कीटनाशी का छिड़काव करने ,  फसलों को काटने छांटने में सक्षम हों तो फिर मौज ही मौज है। ये सब संभव होगा स्वचालन  टेक्नोलॉजी द्वारा।   “कृषि में रोबोटिक्स और स्वचालन” का अर्थ है खेती के कार्यों को आसान और तेज़  करने के लिए विशेष रोबोटों और मशीनों का उपयोग करना। यह कृषि कार्यों में किसान की मदद करने के लिए अतिरिक्त हाथ के जैसा है।  इस टेक्नोलॉजी द्वारा रोबोट कृषि कार्यों को करने में पूरी तरह सक्षम होंगे। वर्ष 2023 में ये टेक्नोलॉजी पॉपुलर होने की संभावना रखती है।  

 

बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology)

 

बायो टेक्नोलॉजी का प्रयोग कृषि फसलों की कमियों में सुधार करने के लिए किया जाता है।  बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत एक फसल के पोषणीय मान में वृद्धि, कीटप्रतिरोधी, सूखा सहिष्णु, जैसे बदलाव किये जा सकते हैं।  बायोटेक्नोलॉजी के प्रयोग से कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

  हालाँकि  बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत  मनुष्य के स्वास्थ्य  और पर्यावरण से जुडी हुयी चिंताएं भी हैं। लेकिन बढ़ी जनसँख्या के बीच खाद्य सुरक्षा और व्यक्ति की पोषणीय आवश्यकताओं की पूर्ती तथा कृषि भूमि के घटते क्षेत्रफल के मध्य बायोटेक्नोलॉजी का बढ़ावा देना तथा इसमें नित नए अनुसंधान करना आज मानव के आवश्यकता बन गया है।  इसलिए वर्ष 2023  में खेत में नयी अनुवांशिक संवर्धित फसलें तथा बाजारों में इनसे निर्मित खाद्य पदार्थों की मात्रा में वृद्धि देखि जायेगी।  

 

कृषि में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GEOGRAPHIC INFORMATION SYSTEMS (GIS) IN AGRICULTURE)

 

कृषि में जीआईएस  प्रणाली द्वारा एक किसान को अपने खेत में फसल की स्थिति, फसल के प्रकार, मिटटी की संरचना, उर्वरक की मात्रा, फसल में कीटों की स्थिति के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। इस प्रणाली के अंतर्गत डाटा प्राप्ति के लिए उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग उपकरणों , ड्रोन टेक्नोलॉजी इत्यादि की सहायता ली जाती है।

जीआईएस रिमोट सेंसिंग उपकरणों और सॉफ्टवेयर से उत्पन्न डेटा के साथ, किसान खेत में फसल बोने के लिए सर्वोत्तम स्थान निर्धारित कर सकते हैं और मिट्टी के पोषण में सुधार के बारें में सटीक सूचना प्राप्त कर सकते हैं।  पशुपालन में जीआईएस  पशुओं की प्रत्येक गतिविधि निगरानी के दायरे में होती है। इसके द्वारा  किसानों को अपने पशुओं  के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और  पोषण पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।

 

कृषि में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एंड डाटा साइंस   AI/ML & DATA SCIENCE IN AGRICULTURE TECHNOLOGY

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है AI  कंप्यूटर को सोचने और सीखने की क्षमता देता है। मशीन लर्निंग ML  एआई का एक हिस्सा है जो कंप्यूटर को डेटा से सीखने में मदद करता है। डेटा साइंस  डेटा के विशाल संग्रह से  उपयोगी जानकारी प्राप्त करने से संबंधित  है।  कृषि कार्य में  एआई और एमएल का उपयोग कंप्यूटर को कौन सी फसल किस मौसम के लिए सबसे बेहतर है, पौधों को पानी कब देना है, फसलों की कटाई कब करनी है जैसे सूचनाओं को समझने के लिए किया जाता है।  

डेटा साइंस खेतों से जानकारी को एकत्र करने तथा उन्हें व्यवस्थित करने में मदद करता है।  जैसे किसी क्षेत्र  को कितनी धूप मिलती है, मिट्टी को कितने पानी की आवश्यकता होती है।  कंप्यूटर इस डेटा का उपयोग किसानों को यह सलाह देता है की सर्वोत्तम फसल प्राप्त करने के लिए बीज कब बोना चाहिए। इस प्रकार कृषि प्रौद्योगिकी में एआई/एमएल और डेटा साइंस का अर्थ है किसानों को ढेर सारी जानकारी उपलब्ध कराकर उनके खेतों स्वस्थ और अधिक उत्पादक बनाने में मदद करने के लिए स्मार्ट कंप्यूटर का उपयोग करना। 

 

पुनर्योजी कृषि  (Regenerative  Agriculture) 

 

“पुनर्योजी कृषि” खेती का एक ऐसा तरीका है जहाँ सिर्फ फसल उगाने पर ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि मिटटी के स्स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाता है।  यह वह  तरीका है जो समय के साथ भूमि को स्वस्थ बनाने में मदद करती है। ये प्रणाली  फसलें उगाने और मिट्टी के पोषक तत्वों का उपयोग करने के बजाय, पुनर्योजी कृषि मिट्टी को बेहतर और अधिक उपजाऊ बनाने का प्रयास करती है। जाइए फसल को काटने के बाद हरी खाद का प्रयोग करना, मृदा क्षरण को रोकने के लिए वनस्पति की परत बिछाना। ऐसे ही ढेर सारे उपाय किये जाते हैं।  

 

ड्रोन (drone) 

 

ड्रोन को एक रोबोट से बानी चिड़िया कह सकते हैं जो आसमान में उड़ते हुए खेत के प्रत्येक भाग की निगरानी करता है। यह किसानों को उनकी फसलों और भूमि की देखभाल करने में मदद करता है।  ये  उड़ने वाली मशीनें ऊपर से तस्वीरें ले सकती हैं और किसानों को उनके खेतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती हैं। ये प्रत्येक स्थान की सटीक तस्वीरें ले सकते हैं जिसके कारण किसान को पौधे के स्वस्थ और बीमार रहने की जानकारी सही समय पर प्राप्त होती है। ये ड्रोन खेतों में बीज और रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव भी कर सकते हैं।  

निष्कर्ष   

 

ये समय बदलाव का है। मौसम के पुराने  मानक बदल रहे हैं।  जनसँख्या लगातार बढ़ रही है उसके अनुपात में गुणवत्ता पूर्ण भूमि का लगातार क्षरण हो रहा है।  देश की खाद्य सुरक्षा के लिए, कृषि को एक लाभदायी उद्योग बनाना के लिए ये आवश्यक हो गया है की कृषि की बेहतरी के लिए नवीन अनुसंधान किये जाएँ तथा नयी टेक्नोलॉजी अपनाया जाए।  वर्ष 2023 कृषि क्षेत्र में  टेक्नोलॉजी के प्रवेश की महत्वपूर्ण संभावना बन गया है। 

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