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नए जमाने की नयी बैटरी टेक्नोलॉजी: Latest Battery Technology – 2023

स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक हर एक  को चलाने के लिए इलेक्ट्रिक बैटरी की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रिक बैटरी इन सभी प्रकार के उपकरणों की आत्मा होती है।  इलेक्ट्रिक बैटरी की क्षमता को बढ़ने के लिए नित नए प्रयोग होते रहे हैं।  वर्तमान समय में लिथियम आयन बैटरी टेक्नोलॉजी उपभोक्ता की पहली पसंद बनकर उभरी है।  लिथियम आयन बैटरी की ये खासियत होती है कि  ये छोटे पैकेज में अधिक ऊर्जा संग्रहित  करने की क्षमता रखती है।  ये तेजी से चार्ज होती है तथा अधिक अवधि तक अपनी सेवा देती है। इस आर्टिकल में हम लिथियम आयन बैटरी के अतिरिक्त बैटरी की नयी तकनीकी (Latest Battery Tecnology 2023)  के विकास पर चर्चा करने जा रहे हैं जो बैटरी निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। बैटरी के नए मॉडल सस्ते और टिकाऊ भी होंगे।   

नए जमाने की नयी बैटरी टेक्नोलॉजी: Latest Battery Technology - 2023

 

नयी बैटरी तकनीकी के प्रकार  (Types Of Latest Battery Technology )

  • सॉलिड स्टेट बैटरी (Solid State Battery )
  • लिथियम सल्फर बैटरी (Lithium-Sulfur Battery)
  • कोबाल्ट मुक्त लिथियम आयन बैटरी (Cobalt Free Lithium ion Battery)
  • आयरन एयर बैटरी (Iron Air Battery)
  • ज़िंक बेस बैटरी (Zinc Based Battery)
  • सोडियम आयन बैटरी (Sodium Ion Battery)

लिथियम आयन बैटरी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण ये है की यह सिंगल चार्ज में लम्बी दूरी तय कर सकती हैं।  लिथियम आयन बैटरी वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक वाहन के लिए आवश्यक सभी मांगों  की पूर्ती भी करती हैं।  तो फिर सवाल ये खड़ा होता है की नयी बैटरी के निर्माण के लिए अनुसंधान की आवश्यकता क्यों है?  वर्तमान समय में बैटरी टेक्नोलॉजी अनुसंधान  के पीछे का प्रमुख कारण बैटरी से संबंधित सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाना है।  प्रयास ऐसा है की बैटरी में प्रयोग किये जाने वाले खनिज की उपलब्धता भी बानी रहे तथा  वह वातावरण के अनुकूल भी हों।    

सबसे पहले लिथियम आयन बैटरी की कार्यप्रणाली को समझते हैं तत्पचात बैटरी की अन्य मॉडल को समझने में सरलता होगी।  

  • लिथियम को  बैटरी के एनोड में संचित किया जाता है। इलेक्ट्रोड के धनात्मक आवेश वाले भाग को एनोड कहते हैं जबकि ऋणात्मक आवेश वाले भाग को कैथोड कहते हैं।  
  • बैटरी में प्रयोग किया जाने वाला तरल इलेक्ट्रोलाइट धनात्मक आवेश से युक्त लिथियम आयन को एनोड एवं कैथोड के मध्य स्थानांतरित करता है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप  एनोड पर मुक्त इलेक्ट्रान उत्पन्न होते हैं।  
  • परिणामस्वरुप बैटरी के धनात्मक करंट संग्राहक पर आवेश निर्मित हो जाता है,  जो  बैटरी को उपयोग में लाने वाले  उपकरण के माध्यम से ऋणात्मक धरा संग्राहक की और प्रवाहित होता है 
  •  बैटरी द्वारा उपकरण को पावर देने के समय  एनोड लिथियम आयन को कैथोड पर स्थानांतरित कर देता है तथा चार्जिंग के समय कैथोड लिथियम आयन को वापस एनोड पर स्थानांतरित कर देता है। इस क्रिया विधि से लिथियम बैटरी ऊर्जा प्रवाह की  क्रिया को संचालित करती है।     

अब आपको ये जानकारी मिल गयी की लिथियम आयन बैटरी किस तरह कार्य करती है।  अब हम बैटरी की  दूसरी टेक्नोलॉजी के सम्बन्ध में,  जैसे बैटरी की कार्यप्रणाली, बैटरी की उपयोगिता आदि के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे।   

नयी बैटरी टेक्नोलॉजी (Latest Battery Technology) 

अब यहाँ पर कुछ ऐसी नयी बैटरी टेक्नोलॉजी की बात होने जा रही है जो भविष्य में लिथियम आयन बैटरी का स्थान ले सकती हैं।  

 

                सॉलिड स्टेट बैटरी (SOLID STATE BATTERY)

 

कैसे काम करती हैं (How Do They Work?)

ये बैटरी तरल या जेल इलेक्ट्रोलाइट के स्थान पर ठोस इलेक्ट्रोलाइट का प्रयोग करती है। ठोस इलेक्ट्रोलाइट्स आमतौर पर सिरेमिक, कांच, ठोस बहुलक या सल्फाइट्स से बने होते हैं। सॉलिड-स्टेट बैटरी में आमतौर पर एक कैथोड, एक एनोड और एक सॉलिड-स्टेट इलेक्ट्रोलाइट होता है। विशिष्ट बैटरी रसायन और अनुप्रयोग के आधार पर कैथोड और एनोड सामग्री भिन्न हो सकती है। सामान्य कैथोड सामग्री में लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (LCO), लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP), या लिथियम निकल मैंगनीज कोबाल्ट ऑक्साइड (NMC) शामिल हैं। एनोड में धातु लिथियम या लिथियम टाइटेनियम ऑक्साइड (एलटीओ) जैसी सामग्री शामिल हो सकती है। जब एक सॉलिड-स्टेट बैटरी को चार्ज किया तो बाहरी कारकों द्वारा प्रवाहित विद्युत ऊर्जा  लिथियम आयनों को कैथोड से एनोड तक स्थानांतरित करके ऊर्जा का भण्डारण करती हैं  और जब बैटरी डिस्चार्ज की अवस्था में आती हैं तब लिथियम आयन को प्रवाह एनोड से कैथोड की और विपरीत दिशा में होता है।  इस अवस्था में संगृहीत ऊर्जा को विद्युत प्रवाह के रूप में जारी किया जाता है।    

उपयोग कैसे किया जाएगा (How Will They Be Used?)

वर्ष  2023 में कार निर्माता कंपनी BMW ने ये घोषणा की  कि  वह अपने नए वाहनों के लिए सॉलिड पावर कंपनी  द्वारा निर्मित सॉलिड स्टेट बैटरी का परीक्षण करेगी। जानी मानी पत्रिका Autoweek  के अनुसार कंपनी इलेक्ट्रोलाइट के रूप में सल्फाइड आधारित इलेक्ट्रोलाइट का प्रयोग करेगी।   कंपनी  वर्ष 2025  में अपने इस नए वाहन  को मार्केट में लांच कर सकती है।   हुंडई जैसी अन्य कार निर्माता कंपनी भी सॉलिड स्टेट बैटरी के निर्माण की रेस में सम्मिलित हैं। बैटरियों में ठोस इलेक्ट्रोलाइट्स का उपयोग करने पर यह आग, लीकेज और बैटरी में होने वाली विस्फोट जैसे जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगी। सॉलिड स्टेट बैटरी थर्मल रनवे  के प्रति कम  संवेदनशील होती हैं।  बैटरी की यही खूबियां बैटरी निर्माता को अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। 

फायदे और नुकसान (Pros and Cons of Solid-State Battery)

  • लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में, सॉलिड-स्टेट बैटरी अधिक दक्ष  होती हैं।  समान आकार की दोनों बैटरी में सॉलिड स्टेट बैटरी अधिक शक्ति उत्पन्न करने की क्षमता रखती है। सॉलिड स्टेट बैटरी इलेक्ट्रिक कार अधिक कॉम्पैक्ट बनती है । बैटरी को तेजी से कम समय में चार्ज किया जा सकता है।  बैटरी का वजन हल्का होने से इलेक्ट्रिक कार अधिक दूरी तय करेगी ।  सीएआर मैगज़ीन के अनुसार सॉलिड-स्टेट लॉटरी अन्य बैटरी की तुलना में  सात गुना अधिक रिचार्ज के साथ लम्बी अवधि तक उपयोग में लायी जा सकती है।  सॉलिड स्टेट बैटरी  अग्निरोधी होने के कारण लिथियम बैटरी की तुलना में अधिक सुरक्षित होती हैं।  लिथियम बैटरी आग से सुरक्षा नहीं दे पाती हैं।  सॉलिड स्टेट बैटरी में इलेक्ट्रोलाइट के लीकेज की संभावना नगण्य होती है।  
  • वर्तमान समय  सॉलिड स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी अपने प्रारंभिक चरण में है।  परीक्षण में कमी और सीमित उत्पादन क्षमता के कारण यह मांग की पूर्ति करने में अक्षम हो सकती हैं। लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है इलेक्ट्रिक कार के कुछ मॉडल 2024  के आरम्भ में सड़कों पर फर्राटे भर रहे होंगे।  

 

              लिथियम सल्फर बैटरी (LITHIUM-SULFUR BATTERY)

 

कैसे कार्य करती है (How Do They Work?)

इस नयी बैटरी टेक्नोलॉजी में कैथोड के रूप में सल्फर का प्रयोग किया जाता है तथा एनोड के रूप में लिथियम का प्रयोग किया जाता है।  सल्फर की खूबी यह होती है की ये प्रति  यूनिट अधिक लिथियम आयन को संग्रहण कर सकता है।   इसके कारण लिथियम सल्फर बैटरी की ऊर्जा संग्रहण क्षमता अधिक होती है।  लिथियम मेटल आधारित  एनोड पर निकल और कोबाल्ट से अधिक टिकाऊ होता है।  

उपयोग कैसे किया जाएगा (How Will They Be Used?)

वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी निर्माता लिथियम सल्फर बैटरी को वाहनों में प्रयोग के लिए प्रयासरत हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य अगले पांच वर्ष के भीतर लिथियम आयन बैटरी को व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना है।  इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि  लिथियम-सल्फर बैटरी का उपयोग ऊर्जा भंडारण के साथ-साथ विद्युत से चलने वाले  विमानों और ट्रेनों के लिए भी किया जा सकता है।

लाभ और हानि (Pros and Cons of Lithium-Sulfur Battery)

  • लिथियम सल्फर बैटरी  लिथियम आयन बैटरी की तुलना में अधिक दक्ष होती हैं।  ये इलेक्ट्रिक वाहन की क्षमता और रेंज दोनों में वृद्धि करती हैं। सल्फर के सस्ते और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने के कारण  बैटरी की लागत में कमी आ सकती है।  सल्फर बैटरी के निर्माण की प्रक्रिया लिथियम आयन बैटरी के समान  ही है इसलिए इसके निर्माण के लिए किसी अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सल्फर बैटरी का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल होता है क्योंकि इसके उत्पादन के लिए 25  प्रतिशत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 
  • सल्फर की विद्युत चालकता  निम्न होने के कारण  यह बेहतर प्रदर्शन नहीं करता  है।  रासायनिक क्रियाओं के दौरान पाली सल्फाइड का निर्माण इसकी क्षमता को प्रभावित करता है।   इसके कारण इसकी जीवन अवधि लिथियम  आयन बैटरी की तुलना में कम होती है। 
  •    हालांकि बैटरी की क्षमता को और अधिक उन्नत बनाने के लिए  उन्नत विद्युत चालकता के साथ उन्नत सल्फर कैथोड विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।  इसके अलावा अन्य उपायों में पॉलीसल्फाइड विघटन नियंत्रित करने के लिए सुरक्षात्मक परत बनाना और बैटरी प्रदर्शन और स्थिरता को बढ़ाने के लिए एडिटिव्स और नैनोस्ट्रक्चर सामग्री का उपयोग करना शामिल है।

 

      कोबाल्ट मुक्त लिथियम आयन बैटरी (COBALT FREE LITHIUM  ION               BATTERY)

 

कैसे कार्य करती हैं (How Do They Work?)

ये बैटरी लिथियम-आयन बैटरी की तरह काम करती है।  लिथियम आयन बैटरी की तरह इसमें कोबाल्ट का प्रयोग नहीं किया जाता है।   

उपयोग कैसे किया जाएगा (How Will They Be Used?)

इस प्रकार की बैटरी का निर्माण लिथियम आयन बैटरी से चलने वाले किसी भी  उपकरण के लिए किया जा सकता है। अभी  बैटरी निर्माताओं का ध्यान इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोबाल्ट मुक्त बैटरी के निर्माण पर है।  वर्तमान समय में टेस्ला के कुछ मॉडल में लिथियम आयरन फास्फेट का प्रयोग किया जा रहा है। जल्द ही फोर्ड और वॉक्सवैगन भी अपने नए कार मॉडल्स में कोबाल्ट विकल्प के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। कोबाल्ट के स्थान पर  निकेल  भी एक अच्छा विकल्प है परन्तु आग के प्रति अधिक संवेदनशील होने के  कारण इसका उपयोग कम  ही किया जाता है।    

लाभ और हानि (Pros and Cons of Cobalt-Free Lithium-Ion Battery)

  • सबसे बड़ा लाभ यही है की इनमें कोबाल्ट का प्रयोग नहीं किया जाता है। कोबाल्ट काफी महंगा होता है और इसका खनन भी मानवाधिकार के हनन के अंतर्गत आता है । संयुक्त राज्य अमेरिका वर्ष 2030 तक लिथियम बैटरी में कोबाल्ट के उपयोग को समाप्त करने की संभावना  पर कार्य कर रहा है।  
  • कोबाल्ट के प्रयोग होने का प्रमुख कारण इसका दक्ष होना है।  लिथियम आयन फास्फेट बैटरी एक विकल्प है परन्तु इसका  कम  ऊर्जा घनत्व एवं रेंज इसका नकारात्मक पक्ष है।  

 

               आयरन एयर बैटरी (IRON AIR BATTERIES)

 

कैसे कार्य करती है (How Do They Work?)

ये बैटरी एनोड के रूप में लोहा और कैथोड के रूप में हवा से ऑक्सीजन का उपयोग करती हैं। आयरन एयर बैटरी लोहे और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से विद्युत उत्पन्न करती है। डिस्चार्ज  के दौरान आयरन निर्मित  एनोड ऑक्सीकरण प्रक्रिया के दौरान आयरन ऑक्साइड (जंग) बनता है।  जबकि हवा से ऑक्सीजन कैथोड पर पानी और इलेक्ट्रॉनों के साथ मिलकर हाइड्रॉक्साइड आयन बनाता है। इस प्रक्रिया से विद्युत ऊर्जा निकलती है। चार्ज करने के दौरान यह प्रक्रिया विपरीत जाती है एक बार फिर एनोड पर लोहा उत्पन्न हो जाता है।

कैसे उपयोग में लाई जा सकती है (How Will They Be Used?)

आयरन-एयर बैटरी ऊर्जा भंडारण के लिए एक बेहतर विकल्प है। उच्च ऊर्जा घनत्व के कारण इसकी  रेंज भी अधिक होती है।  यह  लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में 25 गुना अधिक भंडारण घंटे प्रदान करती हैं।  

लाभ और हानि (Pros and Cons of Iron-Air Battery)

  • लोहे की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता, उच्च घनत्व क्षमता और कम लागत के कारण ये तकनीकी बैटरी निर्माता को आकर्षित कर रही है।  अन्य बैटरी की तुलना में  आयरन एयर बैटरी 10 गुना तक सस्ती हैं, और 17 गुना अधिक समय तक चलती हैं।
  • इनके साथ नकारात्म पक्ष ये है की यह आकार में अधिक बड़ी होती हैं।  इसके अलावा ऑक्सीकरण की धीमी प्रक्रिया के कारण ये चार्ज होने में अधिक समय लेती हैं।  

 

                  जिंक आधारित बैटरी (ZINC BASED BATTERY )

 

कैसे कार्य करती है (How Do They Work?)

जिंक-आधारित बैटरी लिथियम-आयन बैटरी की तरह कार्य करती हैं।  इसमें प्रयोग किया जाने  वाला  जिंक आयन बैटरी के एनोड से कैथोड तक प्रवाहित होते हैं। नई बैटरी तकनीक के अंतर्गत ज़िंक आधारित बैटरी में  जिंक-ब्रोमीन, जिंक-मैंगनीज डाइऑक्साइड, जिंक-एयर और जिंक-आयन के पेअर को उपयोग में लाया जाता है।  

उपयोग कैसे किया जाएगा (How Will They Be Used?)

ज़िंक बैटरी की डिस्चार्ज होने की गति धीमी होने के कारण उसका उपयोग सौर ऊर्जा के भण्डारण के लिए किया जा सकता है।  

 लाभ और हानि (Pros and Cons of Zinc-Based Battery)

  • ये बैटरी आमतौर पर ऊर्जा की प्रचुरता को संग्रहित करने में सक्षम होती हैं। इसके उत्पादन में प्रयुक्त सामग्री सस्ती, गैर विषैले और आसानी से उपलब्ध हैं।
  • लेकिन शोधकर्ता अभी भी इन बैटरियों से संबंधित कुछ तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए काम कर रहे हैं।  बैटरी में होने वाली शार्ट सर्किट की समस्या के समाधान को खोजने का प्रयत्न हो रहा है।  

 

                   सोडियम आयन बैटरी (SODIUM ION BATTERY )

 

कैसे कार्य करती है (How Do They Work?)

ये बैटरी लिथियम आयन बैटरी के समान होती है परन्तु इसमें इलेक्ट्रोलाइट के रूप में खारे पानी का प्रयोग किया जाता है।  सोडियम-आयन बैटरी लिथियम-आयन बैटरी के समान चार्जिंग और डिस्चार्जिंग प्रक्रियाओं के दौरान इलेक्ट्रोड के मध्य चार्ज करने के लिए लिथियम आयन के बजाय सोडियम आयन का उपयोग करती हैं। प्रतिक्रिया कर सकते हैं।

उपयोग कैसे किया जाएगा (How Will They Be Used?)

सोडियम पृथ्वी की ऊपरी सतह  में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जो इसे लिथियम का एक किफायती विकल्प बनाता है। सोडियम-आयन बैटरी अपने बुनियादी कार्य सिद्धांतों और सेल कॉन्फ़िगरेशन के संदर्भ में लिथियम-आयन बैटरी के साथ समानताएं साझा करती हैं। वे आम तौर पर एक सोडियम-आयन कंडक्टिंग इलेक्ट्रोलाइट, एक सोडियम धातु या कार्बन-आधारित एनोड, और एक कैथोड सामग्री से युक्त होते हैं जो सोडियम आयनों के साथ परस्पर क्रिया या प्रतिक्रिया कर सकते हैं।  

लाभ और हानि (Pros and Cons of Sodium-Ion Battery)

  • यह आग से संबंधित जोखिम के लिए सुरक्षित है। यह लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में कम तापमान पर भी बेहतर प्रदर्शन करता है और उनके उत्पादन में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों को रीसायकल करना बहुत आसान है, लेकिन वे इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग के लिए बहुत सक्षम नहीं हैं । 
  • कम ऊर्जा घनत्व के बावजूद  सोडियम आयन बैटरी  लिथियम आयन बैटरी की तुलना में केवल  दो-तिहाई ऊर्जा की मात्रा को स्टोर करने में सक्षम होती हैं।  

 

बैटरी भविष्य के उपकरण और वाहन का सबसे उपयोगी भाग है। क्यूंकि  इनको चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा का उत्पादन और भण्डारण इसी बैटरी के छोटे छोटे पैक में संचित होगा। इसलिए सस्ती, दक्ष, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बैटरी उपभोक्ता की पहली पसंद होगी। इसलिए बैटरी निर्माता बैटरी अनुसंधान पर अधिक से अधिक निवेश कर रहे हैं।  भविष्य में उपभोक्ता को और भी अधिक उन्नत बैटरी के मॉडल के लाभ मिलेंगे।  

 

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