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जैविक कृषि क्या है | Oraganic Farming In Hindi | organic farming se krishi kshetra men sudhaar

भारत में कृषि करोड़ों लोगों की जीविका का प्रमुख साधन है। भारत की विशाल जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तथा कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए कृषि क्षेत्र में भारी मात्रा में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट आई है। इसका फसल की पैदावार और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके विपरीत जैविक कृषि ( Organic Farming) केमिकल फ्री उत्पादों के प्रयोग के कारण टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धति के रूप लोकप्रियता प्राप्त कर रही है। इस ब्लॉग में organic farming  in hindi  से संबंधित जानकारी दी जायेगी तथा  भारत में जैविक कृषि (Organic Farming) के लाभ, चुनौतियां तथा इन चुनौतियों को दूर करने के उपायों चर्चा की जाएगी।

 

 

जैविक कृषि क्या है | Oraganic Farming In Hindi | organic farming se krishi kshetra men sudhaar
ऑर्गेनिक फार्मिंग

 

जैविक कृषि क्या है 

 

जैविक कृषि पर्यावरण को लाभ पहुंचाने वाली खेती का एक प्रकार है ।  कृषि की इस प्रणाली में  फसलों के उत्पादन के लिए प्रयोग किये जाने वाली सभी सामग्री या तो जैविक पदार्थों से निर्मित होती हैं या फिर ऐसी टेक्नोलॉजी से निर्मित होती हैं की वह पर्यावरण को कम हानि पहुंचाती हैं ।  कृषि कार्य में रासायनिक उर्वरक के स्थान पर सूक्ष्म जीवों से बने उर्वरक तथा रसायनकी खाद के स्थान पर पशुओं के गोबर और सड़ी गली वनस्पतियों से निर्मित खाद का प्रयोग किया जाता है । इसके कारण जल एवं  भूमिक प्रदूषण पर नियंत्रण होता है ।  वर्तमान समय में सौर ऊर्जा एवं  बिजली से चलने वाले उपकरणों के कारण  ध्वनि प्रदूषण की समस्या से भी किसानों को राहत मिल रही है ।

 

 भारत में जैविक कृषि के लाभ:

 

भारत में विस्तृत क्षेत्र में कृषि कार्य किया जाता है। जैविक कृषि प्रणाली अपनाने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त

 

🌿 जैविक कृषि (Organic Farming) मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार:

 

जैविक कृषि (Oraganic Farming) में कंपोस्ट खाद और हरी खाद जैसे प्राकृतिक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाता है। ये प्राकृतिक उपाय मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता को बढ़ावा देते है। प्राकृतिक खाद मिट्टी में नमी को बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा मिट्टी की संरचना में सुधार करने का कार्य करती है। प्राकृतिक खाद के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादकता में वृद्धि होती है।

 

🌿 जैविक कृषि (Organic Farming)का पर्यावरण लाभ:

 

रासायनिक उर्वरक में उपस्थित केमिकल मिट्टी और जल को प्रदूषित कर देते हैं। इसके कारण पर्यावरण को नुकसान होता है तथा जीव जंतुओं का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। जबकि जैविक कृषि में प्राकृतिक पदार्थों से निर्मित उत्पादों का प्रयोग कृषि कार्य के लिए किया जाता है। यह स्वास्थ्य पर्यावरण के निर्माण में सहायक होता है।

 

🌿 जैविक कृषि (Organic Farming) स्वास्थ्यवर्धक है

 

जैविक कृषि (Oraganic Farming) द्वारा उत्पन्न कृषि उत्पाद हानिकारक रसायनों तथा विषाक्त पदार्थों से मुक्त होते हैं। इन उत्पादों की पोषकता अधिक होती है। इनमें उच्च स्तर पर एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह कैंसर, डायबिटीज,हार्ट अटैक जैसी बीमारियों को नियंत्रित करता है। वहीं रासायनिक पदार्थों से उत्पन्न कृषि उत्पाद कैंसर जैसी बीमारी का एक प्रमुख कारण हैं।

 

🌿 जैविक कृषि(Organic Farming) से बढ़ेगी आमदनी

आरंभिक चरण में जैविक कृषि (Oraganic Farming) अधिक लागत के कारण एक महंगा विकल्प दिखता है। परंतु दीर्घ अवधि में यह एक लाभदायक विकल्प बन जाता है। आगे चलकर प्राकृतिक उर्वरकों और कीट नियंत्रण विधियों के उपयोग से निवेश की लागत कम हो जाती है। मिट्टी की गुणवत्ता में वृद्धि से अधिक पैदावार और उच्च गुणवत्ता वाली फसलों का उत्पादन होता है। इनकी बाजार में कीमत भी अधिक होती है।

 

🌿 प्रदूषण पर नियंत्रण

 

जैविक कृषि सतत विकास को बढ़ावा देने वाली कृषि प्रणाली है। जैविक कृषि को व्यवहार में लाकर जल और मृदा प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें ऊर्जा के रूप में नवीकरणीय संसाधनों का प्रयोग किया जाता है। यह ग्रीन हाउस गैसों के उत्पादन पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। इसके कारण जलवायु में स्थायित्व बना रहता है।

 

भारत में जैविक खेती की चुनौतियाँ:

यूं तो जैविक कृषि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए नवीन प्रणाली है परंतु इसको प्रयोग में लाने के लिए चुनौतियां भी कम नहीं है। भारत में जैविक कृषि के व्यवहार में लाने के लिए निम्नलिखित चुनौतियां हैं।

 

जैविक कृषि (Organic Farming) के प्रति जागरूकता की कमी:

 

भारत के किसान जागरूकता में कमी के कारण जैविक कृषि की अवधारणा और इससे प्राप्त होने वाले लाभों से अनजान हैं। इसके कारण कृषि उत्पादकता में कमी के कारण बाजार में जैविक उत्पादों की मांग में वृद्धि नहीं हो पाती है। इसका परिणाम यह होता है की किसान जैविक खेती के प्रति अपनी रूचि नहीं दिखा पाता है।

 

जैविक कृषि (Organic Farming) में कृषि उत्पादों के प्रमाणन की समस्या

जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए इसके प्रमाणन की आवश्यकता होती। ये प्रमाणन राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) जैसे सरकारी निकायों द्वारा दिया जाता है। प्रमाणन प्रक्रिया समय लेने वाली और महंगी होने के कारण छोटे किसानों के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

 

बुनियादी ढांचे में निवेश की समस्या:

 

जैविक कृषि के लिए खाद उत्पादन के गड्ढे, वर्मीकम्पोस्टिंग इकाइयां और जैविक खाद भंडारण सुविधाएं जैसे बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती । छोटे किसान इन बुनियादी ढांचे में निवेश करने में वित्तीय रूप में असमर्थ होते हैं। ऐसे किसानों की रुचि` जैविक कृषि के स्थान पर पारंपरिक खेती की और अधिक रहती है।

 

प्रभावी कीट और रोग नियंत्रण की समस्या:

 

जैविक कृषि में कीट नियंत्रण के लिए प्राकृतिक तरीकों का प्रयोग किया जाता है जैसे- फसल रोटेशन, इंटरक्रॉपिंग और जैविक नियंत्रण विधियां। परन्तु ये प्राकृतिक उपाय सिंथेटिक कीटनाशकों की तरह प्रभावी नहीं हो सकते हैं। इन उपायों को कृषि कार्य में अपनाने से फसल को नुकसान हो सकता तथा फसलों की पैदावार भी कम हो सकती है।

 

जैविक कृषि (Organic Farming) उत्पादों के लिए बाजार की चुनौतियां:

 

किसानों के खेतों के नजदीकी क्षेत्र में जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए विश्वसनीय बाजार न होने के कारण अपनी उपज को आने पौने दाम में बेचने पर विवश होना पड़ सकता है। अपने उत्पाद की कीमत उम्मीद के अनुरूप न मिलने के कारण यह किसानों को जैविक खेती के तरीकों को अपनाने से हतोत्साहित कर सकता है

 

चुनौतियों से निपटने के उपाय

 

अगर कहीं समस्या होती है तो उसका समाधान भी उसी में छिपा होता है। जैविक कृषि में भले ही विविध प्रकार की चुनौतियां हों किंतु इसका समाधान निम्नलिखित उपायों को क्रियान्वित करके किया जा सकता है।

 

फसल विविधता का महत्व:

 

जैविक कृषि विविध प्रकार की फसलों की खेती को बढ़ावा देती है। यह मिट्टी के गुणवत्ता को बनाए रखने तथा मिट्टी से होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करती है। फसल विविधता फसल के खराब होने के जोखिम को कम करने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद करता है।

 

किसानों की सहकारी समितियों की भूमिका:

 

भारत में जैविक खेती को बढ़ावा देने में कृषि सहकारी समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वे छोटी जोत के किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन सहायता प्रदान करके जैविक कृषि के लिए सक्षम बना सकती है।

 

सरकारी पहलें:

 

भारत सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। जैसे परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) और जैविक खेती योजना। ये योजनाएं जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।

 

उपभोक्ता  की जागरूकता:

 

सिर्फ किसानों को जागरूक करने से जैविक कृषि को बढ़ावा नहीं मिलेगा। किसान तभी जैविक कृषि को अपनाएंगे जब उनके उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी। इसीलिए उपभोक्ता को जैविक उत्पादों के लाभ के बारे में जागरूक बनाना होगा। यह कार्य शिक्षा अभियानों, लेबलिंग आवश्यकताओं और प्रमाणन कार्यक्रमों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

 

जैवि कृषि (Organic Farming) उत्पादों की ग्रेडिंग में सुधार

 

जैविक उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है। मांग को पूरा करने के लिए जैविक कृषि में प्रगति एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। जैविक कृषि पद्धतियों की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और अनुसंधान में निवेश की आवश्यकता है।

 

जैविक कृषि (Organic Farming) के लिए वैश्विक बाजार में अवसर:

 

जैविक प्रमाणन मानकों का अनुपालन आवश्यक है, जो छोटे पैमाने के किसानों के लिए एक चुनौती हो सकती है।वर्तमान समय में वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों की मांग में तेजी से वृद्धि हुयी है। बाजार इस मांग को पूरा करने में अभी सक्षम नहीं बन पाया है। भारत जैविक उत्पादों के लिए निर्यातक बाजार का रूप ले सकता है, जो किसानों को अधिक मुनाफा कमाने के नए अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों एवं नियमों का पालन छोटे किसानों के लिए चुनौती पूर्ण हो सकता है।

 

अनुसंधान का महत्व:

 

जैविक खेती के तरीकों में सुधार लाने और उन्हें अधिक प्रभावी और कुशल बनाने के लिए अनुसंधान महत्वपूर्ण है। इसमें अन्य विषयों के अलावा मृदा स्वास्थ्य, कीट और रोग प्रबंधन, और फसल विविधता पर शोध सम्मिलित है।

 

निष्कर्ष 

 

जैविक कृषि (Organic Farming) को व्यवहार में लाने से किसान, उपभोक्ता और पर्यावरण लिए कई फायदे हैं। लेकिन कृषि की इस पद्धति में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। भारत में जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए, इसके लाभों के विषय में जागरूकता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे और प्रमाणन प्रक्रियाओं में सुधार करने तथा सब्सिडी और विपणन पहलों के माध्यम से किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए एक ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। सही नीतियों और समर्थन के साथ जैविक कृषि (Organic Farming) भारत के कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। जो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण करेगी।

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