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हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी (Hydrogen Fuel Technology) : पृथ्वी को बचाने का ब्रह्मास्त्र

 वर्तमान में दुनिया के सामने सबसे बड़ी समस्या और चुनौती लगातार दूषित और परिवर्तित हो रहा पर्यावरण है । मानव द्वारा विकासात्मक गतिविधियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग  इस समस्या की जड़ है।  पर्यावरण को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो पर्यावरण को कम से कम हानि पहुंचाए और आम आदमी के लिए सुलभ हो।  हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी वह ब्रह्मास्त्र है जो पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुंचाते हुए पृथ्वी के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है।  इस ब्लॉग में हम हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, उसके प्रकार, लाभ और चुनौतियां के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे।  

 

हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी (Hydrogen Fuel Technology) : पृथ्वी को बचाने का ब्रह्मास्त्र
हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन

हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी क्या है (What is Hydrogen Fuel Technology?)

 

  • हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की एक टेक्नोलॉजी है । हाइड्रोजन द्वारा ऊर्जा के उत्पादन में किसी भी प्रकार की ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन  नहीं होता है।  इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पादन से लेकर  इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जा सकता है।  इस टेक्नॉलजी के अंतर्गत फ्यूल सेल नामक उपकरण का प्रयोग किया जाता है, जिसके अंदर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मध्य प्रतिक्रिया होने से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है।  इस प्रक्रिया में बॉय प्रोडक्ट  के रूप में जल वाष्प उत्पन्न होती है। 

 

  • हाइड्रोजन पूरे ब्रह्माण्ड में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसे विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है।  स्टीम मीथेन रेफोर्मिंग हाइड्रोजन उत्पादन का सबसे आम तरीका है।  इसमें मीथेन गैस और जल वाष्प के मध्य प्रतिक्रिया द्वारा हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्पादन होता  है। इलेक्ट्रोलिसिस अन्य प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत विद्युत की सहायता से जल के अणुओं को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ा  जाता है।  इसके अलावा हाइड्रोजन बायोमास और सौर संचालित इलेक्ट्रोलिसिस की प्रतिक्रिया के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।  

 

  • हाइड्रोजन की ये खासियत है कि  इसे सम्पीड़ित गैस, तरल अवस्था या ऐसी  सामग्री के रूप में संग्रहित  करके रखा जा सकता है, जो हाइड्रोजन को अवशोषित या मुक्त कर सकता है ।  हाइड्रोजन गैस के वितरण और परिवहन के लिए भण्डारण टैंक, पाइपलाइन और फ्यूल फिलिंग स्टेशन जैसे अवसंरचना की आवश्यकता होती है।   

 

हाइड्रोजन का उत्पादन कैसे किया जाता है (How is Hydrogen Produced?)

 

हाइड्रोजन का उत्पादन विभिन्न विधियों से किया जा सकता है।  सभी के अपने अलग अलग फायदे और आवश्यकताएं हैं।  

 

स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग  (Steam Methane Reforming) (SMR):

 

स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग टेक्नोलॉजी वैश्विक स्तर  पर हाइड्रोजन के उत्पादन में सबसे अधिक प्रयोग में लाई  जाती है। इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत उत्प्रेरक की उपस्थिति में मीथेन की पानी के भाप के साथ प्रतिक्रिया  कराई जाती  है। इसमें बायप्रोडक्ट के रूप में हाइड्रोजन और कॉर्बन डाई ऑक्साइड का उत्पादन होता है।   यह अभिक्रिया निम्नलिखित समीकरण द्वारा संपन्न होती है।  

 

                 CH4 + H2O → CO2 + 3H2

 

smr  टेक्नोलॉजी प्राकृतिक गैस की प्रचुर उपलब्धता के कारण अधिक प्रचलित है।  हालांकि इस  प्रक्रिया  में हाइड्रोजन के निर्माण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड  गैस का उत्सर्जन होता। ग्रीन हाउस गैस होने के कारण यह पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है। इस प्रक्रिया द्वारा निर्मित हाइड्रोजन को ग्रे हाइड्रोजन कहा जाता है।    हालांकि नवीन टेक्नोलॉजी के अंतर्गत कार्बन कैप्चर और कार्बन स्टोरेज टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रित करके हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा रहा है। इस विधि से उत्पन्न हाइड्रोजन को ब्लू हाइड्रोजन ( blue  hydrogen ) कहते है।    

 

इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis):

 

इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया  विद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से पानी के अणुओं (H2O) को हाइड्रोजन (H2) और ऑक्सीजन (O2) में विभाजित करने के लिए विद्युत  का उपयोग करती है।

यह रासायनिक प्रतिक्रिया  इलेक्ट्रोलाइजर में होती है जिसमें जल  में डूबे हुए इलेक्ट्रोड और कैथोड होते हैं।  जब जल  में विद्युत धारा  प्रवाहित की जाती है तब  एनोड पर ऑक्सीजन गैस तथा कैथोड पर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। इसका रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है।  

 

                            2H2O → 2H2 + O2

 

इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया को  विद्युत उत्पादन के  विभिन्न स्रोतों द्वारा संचालित किया जा सकता है।  जब इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया के लिए  नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (सौर या पवन ऊर्जा आदि ) से विद्युत का प्रयोग किया जाता है तो इस प्रक्रिया में उत्पन्न  हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen ) कहते क्योंकि इससे किसी भी प्रकार की ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन नहीं होता है।  भारत सरकार का  राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen  Mission)  ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से संबंधित है। 

 

बायोमास गैसीकरण (Biomass Gasification):

 

बायोमास गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे जैविक अपशिष्ट जैसे कृषि अपशिष्ट, वानिकी अपशिष्ट इत्यादि से  हाइड्रोजन और कॉर्बन मोनोऑक्साइड  का एक  मिश्रण तैयार किया जाता है।  इस मिश्रण को  सिन  गैस( syngas) अथवा सिंथेसिस गैस कहते हैं।  सिन गैस को संसाधित (processed ) करके शुद्ध हाइड्रोजन  प्राप्त किया जाता है।  बायोमास गैसीकरण की प्रक्रिया  हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए जैविक अपशिष्ट पदार्थों और नवीकरणीय फीडस्टॉक्स का उपयोग करके  चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy ) में योगदान देने और ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम करने में मदद करती है ।  

 

अन्य तरीके ( Other Methods):

 

हाइड्रोजन उत्पादन के अन्य विधियों  में हाइड्रोकार्बन का आंशिक ऑक्सीकरण, कोयला का  गैसीकरण, उच्च तापमान पर पानी का विभाजन और सल्फर-आयोडीन चक्र जैसी थर्मोकेमिकल प्रक्रियाएं सम्मिलित हैं । हाइड्रोजन उत्पादन के इन तरीकों का प्रयोग सीमित मात्रा में होता है।  इनमें से अधिकांश अभी अनुसंधान और विकास के चरण में हैं।

 

हाइड्रोजन  के प्रकार (Types Of Hydrogen)

उत्पादन की विधि और इसमें उपयोग में लाये जाने वाले स्त्रोत के आधार पर उत्पादित हाइड्रोजन के विभिन्न प्रकार पाए जाते हैं।  जो निम्नलिखित हैं 

 

  • ग्रे हाइड्रोजन ( Grey Hydrogen ):

      ग्रे हाइड्रोजन का निर्माण स्टीम रिफॉर्मिंग  प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैसों का प्रयोग किया जाता है।  

 

  • ब्लू हाइड्रोजन ( Blue Hydrogen )

    ब्लू हाइड्रोजन  निर्माण स्टीम  रिफॉर्मिंग प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।  इसमें हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैसों का प्रयोग नियंत्रित विधि से किया जाता है। हाइड्रोजन उत्पादन के दौरान निकलने वाले कार्बन को कैप्चर कर लिया जाता है।  

 

  • ब्लैक हाइड्रोजन  (Black Hydrogen )

    ब्लैक हाइड्रोजन  का निर्माण गैसीफिकेशन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है।  

 

  • पिंक हाइड्रोजन ( Pink Hydrogen )

    पिंक  हाइड्रोजन  का निर्माण इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) का प्रयोग किया जाता है।  

 

  • टरक्वॉइज़ हाइड्रोजन (Turquoise Hydrogen )

    हाइड्रोजन का निर्माण पैरोलिसिस (Pyrolysis) विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में हाइड्रोजन के निर्माण के लिए प्राकृतिक गैस का प्रयोग किया जाता है।  

 

  • येलो  हाइड्रोजन  ( Yellow Hydrogen )

    येलो हाइड्रोजन का निर्माण इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है।  

 

    • ग्रीन हाइड्रोजन  ( Green Hydrogen  )

      ग्रीन हाइड्रोजनग्रीन हाइड्रोजन  का निर्माण इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।  इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन के निर्माण के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का उपयोग किया जाता है।   

 

 

 

 हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी के लाभ   (Advantages of Hydrogen Fuel Technology):

 

  •  पर्यावरणीय लाभ:

     यह एक एनवायरनमेंट फ्रेंडली टेक्नोलॉजी है।  जब हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है तो इसके द्वारा उत्सर्जित एकमात्र उत्पाद जल वाष्प होता है।  इसका ये गुण  इसे जीवाश्म ईंधन की तुलना में स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प बनाता  है।  हाइड्रोजन ईंधन शून्य ग्रीन हाउस उत्पादन के कारण यह जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है।  

 

  •  ऊर्जा दक्षता:

      हाइड्रोजन ईंधन सेल आंतरिक दहन इंजनों की तुलना में अधिक ऊर्जा  कुशल होते हैं।  यह उच्च ऊर्जा दक्षता के साथ ईंधन को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।  ऊर्जा दक्षता की दर में  वृद्धि से ऊर्जा की बर्बादी कम  होती है  जो इसे एक टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली में परिवर्तित करती है। 

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  •   बहुआयामी उपयोग:

      हाइड्रोजन का उपयोग  बिजली के उत्पादन, परिवहन और हीटिंग प्रक्रिया के लिए किया जा सकता है।  हाइड्रोजन फ्यूल सेल  इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में अधिक शक्ति, अधिक दूरी की ड्राइविंग रेंज और फ्यूल रिफिल  में काम समय की सुविधा प्रदान करते हैं।  इसके आलावा हाइड्रोजन का उत्पादन विभिन्न स्रोतों जैसे  नवीकरणीय ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और बायोमास इत्यादि से किया जा सकता है।   

 

 चुनौतियां और सीमाएं  (Challenges and Limitations):

 

  • हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी को व्यापक रूप से अपनाने में  सबसे बड़ी चुनौती  इसके उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास में  आने वाली अधिक लागत है। वर्तमान समय में  पारंपरिक ईंधन की तुलना में हाइड्रोजन का उत्पादन अपेक्षाकृत महंगा है। इसके अलावा हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक अवसंरचना की स्थापना के लिए बड़ी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होती है।
  • हाइड्रोजन के कम  ऊर्जा घनत्व के कारण इसे पारंपरिक  ईंधन की तुलना में अधिक भंडारण मात्रा की आवश्यकता होती है।  हाइड्रोजन फ्यूल के व्यापक उपयोग के लिए दक्ष और सुरक्षित भण्डारण समाधान खोजना महत्वपूर्ण है।  हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस होने के कारण इसके सुरक्षित परिवहन के लिए अधिक दक्ष टेक्नोलॉजी की आवश्यकता होती है।   

 

हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी के आशाजनक अनुप्रयोग (Promising Applications of Hydrogen Fuel Technology): 

 

  • हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी परिवहन प्रणाली को  कॉर्बन के उत्सर्जन से मुक्त  करता है।  हाइड्रोजन से  चलने वाले फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEVs)  ग्रीन हाउस गैस का जीरो उत्सर्जन करते हैं।  यह बैटरी  से  चलने वाले  इलेक्ट्रिक वाहन की  तुलना में अधिक दूरी  तय करते हैं।  इसके अलावा, हाइड्रोजन का उपयोग लंबी दूरी के ट्रकों, ट्रेनों और जहाजों के लिए भी किया जा सकता है जिसके कारण इन परिवहन साधनों से उत्पन्न  उत्सर्जन में कमी आएगी। 

 

  • विभिन्न उद्योगों में हाइड्रोजन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।  इसके अंतर्गत पेट्रोलियम परिष्करण, उर्वरक निर्माण के लिए अमोनिया का उत्पादन और विभिन्न प्रकार के रसायनों का निर्माण सम्मिलित  है। इन  उद्योगों में पारंपरिक  रूप से उत्पादित  हाइड्रोजन का प्रयोग किया जाता है।  पारंपरिक हाइड्रोजन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग  करने से ऐसे उद्योगों को अपना कार्बन फुटप्रिंट कम करने में सहायता मिलेगी। 

 

  • पवन और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में विविध प्रकार के अवरोध का सामना करना पड़ता है।  हाइड्रोजन का उपयोग ऊर्जा भंडारण  के रूप में किया जा सकता है।  हाइड्रोजन द्वारा उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को वापस   इलेक्ट्रोलिसिस  के माध्यम से हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर इसे वापस विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।  इस प्रक्रिया के मध्य से विद्युत ग्रिड को संतुलित रखने में सहायता मिलेगी  तथा विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति बिना किसी बाधा के सुनिश्चित होगी।     

 

 निष्कर्ष :

 

हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी में  ऊर्जा प्रणालियों में क्रांति लाने और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की अपार क्षमता है। भविष्य में इसके पर्यावरणीय लाभ और बहुआयामी उपयोगिता फ्यूल टेक्नोलॉजी में अन्य टेक्नॉलजी की तुलना में महत्त्वपूर्ण बढ़त दिलाते  है। तमाम  चुनौतियों के बावजूद  हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी के लिए चल रहे अनुसंधान, नवाचार और सहायक नीतियां धीरे-धीरे इसके उपयोगिता और दक्षता में सुधार कर रही हैं। हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी का निरंतर विकास पृथ्वी के वातावरण से प्रदूषण के स्तर  को कम करने का कार्य करेगा।  

 

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